कभी इंधन मंहगा कभी चीनी महंगी और अब तो हद हो गई हमने सुना है की प्याज 80 रूपए किलो बिक रहा है , हमने तो जब से सुना है प्याज खाने की सोग्नद ही लेने की सोच रहे है क्योंकि इतना मंहगा प्याज हमारे बस का नहीं है यह तो कोई नेता या अभिनेता ही खा सकता है ,कोई समय यह ही हमारे जैसे गरीबों का खाना हुआ करता था प्याज और रोटी बड़ा मजा आता था खाने मे मगर अब तो कभी हमारे जैसो को अगर प्याज खाते हुए अगर किसी नै देख लिया तो विजिलेंस डिपार्टमेंट वाले छापा मारने आ जायँग यह सोच कर की बहुत पैसे वाला लगता है I हमारी किस्मत ही कुछ ऐसी है की अभी पिछली सीजन मे प्याज की फसल अच्छी होने वाली थी की बिना मोसम की बारिस ने ख़राब कर दी और कोई पूछने भी नहीं आया की तुम लोगों का कितना नुकसान हुआ सर्वे जरुर हुआ था मगर मिला अभी तक कुछ नहीं , इन्सान इस मंहगाई के निचे दफ़न होकर रह गया सोचने के लिय समय ही नहीं मिलता है की क्या सस्ता है और क्या मंहगा है सबसे सस्ती जान है जिसको कोई भी कुचल कर चला जाता है और वो घुट घुट कर मर जाता है मरने के बाद घर वालो को सांत्वना देने के लिय समय निकलना ही परता है क्यों की चुनाव होने वाले है न.
कभी कोई फाँसी का फंदा लगा लेता है कोई जहर खा लेता है तो सरकार मुवावजा देती है जब तक जींदा है कोई पूछने वाला भी नहीं ,कीआखिर क्यों मरने के बाद मिलता है अगर पहले कुछ मिलता तो मरना नहीं पड़ता मरने के बाद राज्य सरकार थोडा बहुत रुपया उसकी बीबी ,बच्चों को देकर दिलासा दी देती है वो इतना आसानी से नहीं मिलता है 1 लाख मिलेगा तो उसमे से कम से कम 20 हजार खर्चा हो जाता है ,अगर यही पैसा जिन्दा रहने के समय मिल जाता तो उसको मारने की नोबत ही नहीं आती, तो दोस्तों मेरा कहने का मतलब यही है की चाह किसी की भी सरकार हो हमको यह सब मुग्तना पडेगा , पता नहीं कल किस का नंबर आयेगा , हमारे देश को यह लोग तार -तार कर देंगे सो जागो अभी अगर नींद नहीं खुली तो फिर कभी भी नहीं उठोगे , इनसे तो अंग्रेज ही ठीक थे, उन्होने कुछ ने कुछ तो निर्माण किया था हमको जिन्होने आझादी दिलवाई उनकी आत्मा भी रो रही होगी की यह क्या हो रहा है I ….. बाकि कल

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